इस आर्टिकल में
- छोटा जवाब
- SE Ranking है क्या
- वेंडर की अपनी कीमत क्या है
- क्लाइंट वर्क में कौन से फ़ीचर काम आते हैं
- भारत में यह किसके लिए है, और किसे छोड़ देना चाहिए
- BundledSEO से आपको क्या मिलता है
- पहले तीस दिन कैसे चलाएँ
- रुपये में बिलिंग, GST और क्लाइंट को क्या बताना है
- हमारे कैटलॉग में इसके विकल्प
- भारत से कैसे ख़रीदें
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
महीने की पहली तारीख़ को क्लाइंट का मैसेज आता है: “रिपोर्ट भेज दीजिए।” उस मैसेज के बाद आप जो टूल खोलते हैं, महीने भर में सबसे ज़्यादा वही खुलता है। रैंकिंग ऊपर गई, यह रहा चार्ट, यह रहा काम, अब इनवॉइस क्लियर कीजिए। SE Ranking इसी रिपोर्ट के इर्द गिर्द बना है, और यही वजह है कि इंदौर, जयपुर और पुणे के उन फ़्रीलांसरों के बीच इसका नाम बार बार आता है जो Google Sheet में मैन्युअल रैंक चेक करते करते थक चुके हैं।
यह रिव्यू उसी पाठक के लिए है। दो से दस क्लाइंट, कुछ लोकल, कुछ Upwork या Fiverr से आए दुबई और यूके के, बिलिंग रुपये में, और हर डॉलर वाले खर्च पर दो बार सोचना पड़ता है।
छोटा जवाब
- अगर आपका मुख्य काम क्लाइंट को रैंकिंग साबित करना है, तो SE Ranking भारतीय फ़्रीलांसर या दो लोगों की एजेंसी के लिए ठीक बैठता है। देश और शहर के हिसाब से रैंक ट्रैकिंग, शेड्यूल पर चलने वाला साइट ऑडिट और रिपोर्ट बिल्डर, तीनों एक ही लॉगिन में हैं, और बिल आप इन्हीं तीन का करते हैं।
- वेंडर की अपनी कीमत यूरोपीय और अमेरिकी एजेंसियों के हिसाब से रखी गई है। seranking.com/pricing पर 21 सितंबर 2026 को देखने पर सबसे सस्ता प्लान सालाना बिलिंग पर €87.20 प्रति माह दिखा, और पेज ने हमें यूरो में कीमत दिखाई। एक भी क्लाइंट पैसा देने से पहले यह रुपये में भारी लाइन आइटम बन जाता है।
- हमारे यहाँ SE Ranking सिंगल टूल के तौर पर ₹299/महीना है, और इसे शामिल करने वाला इकलौता प्लान Ultimate है, ₹2,499/महीना। अगर लिस्ट में सिर्फ़ SE Ranking है तो सिंगल ही लीजिए। प्लान तभी समझ आता है जब आप उसके बाक़ी 91 टूल्स में से ठीक ठाक इस्तेमाल करने वाले हों।
SE Ranking है क्या
SE Ranking उसी परिवार का ऑल इन वन SEO प्लेटफ़ॉर्म है जिसमें Semrush और Serpstat आते हैं, बस इसका वज़न किसी और जगह टिका है। Semrush अपने कीवर्ड और कॉम्पिटिटर डेटाबेस के चारों तरफ़ बना है। SE Ranking प्रोजेक्ट के चारों तरफ़ बना है: आप क्लाइंट की साइट जोड़ते हैं, सर्च इंजन और लोकेशन चुनते हैं, कीवर्ड लोड करते हैं, और उसके बाद प्लेटफ़ॉर्म तय शेड्यूल पर पोज़िशन ट्रैक करता रहता है, साइट को क्रॉल करके टेक्निकल दिक़्क़तें निकालता रहता है, और दोनों को एक ऐसी रिपोर्ट में पैक कर देता है जो आप भेज सकें।
यही प्रोजेक्ट वाली बनावट एजेंसियों को पसंद आती है। छह क्लाइंट वाले भारतीय फ़्रीलांसर के लिए छह प्रोजेक्ट होते हैं, हर एक की अपनी कीवर्ड लिस्ट, अपनी लोकेशन (सूरत के टेक्सटाइल एक्सपोर्टर के लिए google.co.in, मैनचेस्टर की डेंटल क्लिनिक के लिए google.co.uk) और अपना रिपोर्ट टेम्पलेट। रोज़ का काम छह डैशबोर्ड देखना है, रिसर्च कभी कभी की चीज़ है।
प्रोजेक्ट के इर्द गिर्द वही रिसर्च टूल्स हैं जिनकी उम्मीद रहती है: देश के हिसाब से वॉल्यूम और डिफ़िकल्टी देने वाला कीवर्ड टूल, कॉम्पिटिटर रिसर्च, बैकलिंक चेकर, और अलग अलग URL के लिए ऑन पेज चेकर। ये सब काम भर के हैं, इससे ज़्यादा नहीं, और बैकलिंक इंडेक्स तो बड़े दोनों टूल्स से साफ़ छोटा है। लोग SE Ranking इसलिए ख़रीदते हैं कि ट्रैकिंग, ऑडिट और रिपोर्ट एक जगह मिल जाते हैं और रिपोर्ट क्लाइंट को अच्छी लगती है।
2026 में वेंडर ने AI सर्च ट्रैकिंग भी जोड़ी है, यानी ChatGPT, Perplexity और Google AI Overviews में पोज़िशन, अलग ऐड ऑन के तौर पर। आज के ज़्यादातर भारतीय क्लाइंट वर्क के लिए यह शौक़ की चीज़ है। जो क्लाइंट इसे माँगते हैं वे यूके या यूएस बजट वाले होते हैं, और वहाँ भी यह रिपोर्ट की दूसरी या तीसरी लाइन ही रहती है।
वेंडर की अपनी कीमत क्या है
प्लान का ढाँचा 2025 में बदला था और नीचे के नंबर वही हैं जो वेंडर के अपने प्राइसिंग पेज पर हमें लोड करने पर दिखे। सारे आँकड़े seranking.com/pricing से हैं, 21 सितंबर 2026 को देखे गए, और सब यूरो में दिख रहे थे। पेज आपकी कनेक्शन लोकेशन से करेंसी चुनता है, इसलिए भारत से आपको इसके बदले अमेरिकी डॉलर दिख सकते हैं; प्लान की लिमिट दोनों हालत में एक ही रहती हैं।
| प्लान | प्रति माह, सालाना बिलिंग | प्रति माह, मासिक बिलिंग | प्रोजेक्ट | रोज़ ट्रैक होने वाले कीवर्ड | मैनेजर सीट | साइट ऑडिट पेज प्रति माह |
|---|---|---|---|---|---|---|
| Core | €87.20 | €109.00 | 10 | 2,000 (और 100 AI prompts) | 1 | 250,000 |
| Growth | €188.00 | €235.00 | 30 | 5,000 (और 250 AI prompts) | 3 | 2,000,000 |
| Enterprise | कस्टम | कस्टम | कस्टम | कस्टम | कस्टम | कस्टम |
क्लाइंट को रिपोर्ट देने वाले फ़्रीलांसर के लिए उसी पेज और उसी तारीख़ की तीन बातें हेडलाइन नंबर से ज़्यादा मायने रखती हैं:
- व्हाइट लेबल रिपोर्टिंग Core में नहीं है। वह Agency Pack ऐड ऑन के साथ आती है, प्लान के ऊपर +€59.00 प्रति माह, सिर्फ़ सालाना बिलिंग पर। यानी “PDF पर मेरा अपना लोगो” की ईमानदार कीमत Core या Growth प्लान और उसके ऊपर €59.00 महीना है, साल भर का पैसा एक साथ।
- लोकल रैंक ट्रैकिंग में हर प्लान के साथ 3 लोकेशन आती हैं, उससे ज़्यादा लोकेशन €16.80 प्रति माह प्रति लोकेशन से शुरू होती है। तीन शहर में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु आ गए तो बात ख़त्म। जयपुर का क्लाइंट चौथी लोकेशन है, कोयंबटूर का पाँचवीं।
- 14 दिन का ट्रायल है और उसके लिए कार्ड नहीं माँगा जाता। फ़्रीलांसर के लिए इतना काफ़ी है कि एक क्लाइंट प्रोजेक्ट बनाकर, एक ऑडिट चलाकर देख लें कि रिपोर्ट का फ़ॉर्मैट आपके क्लाइंट मानेंगे या नहीं।
सालाना और मासिक के बीच 20% का फ़र्क़ है, और सालाना पैसा पहले देना होता है। भारतीय कार्ड से विदेशी करेंसी में एक साथ साल भर का चार्ज वही ट्रांज़ैक्शन है जो अक्सर डिक्लाइन होता है या जिसके लिए बैंक ऐप में इंटरनेशनल ट्रांज़ैक्शन ऑन करना पड़ता है। उसी पेज के FAQ में लिखा है कि सालाना कमिटमेंट पर सेल्स से बात करके तिमाही शेड्यूल कराया जा सकता है।
क्लाइंट वर्क में कौन से फ़ीचर काम आते हैं
दूसरे महीने के बाद टूल चलता रहेगा या बंद हो जाएगा, यह पाँच चीज़ें तय करती हैं।
google.co.in पर शहर के हिसाब से रैंक ट्रैकिंग
प्रोजेक्ट बनाते समय आप सर्च इंजन और लोकेशन चुनते हैं। Google India वहाँ है, और उसके नीचे शहर सेट किया जा सकता है, ताकि “best dentist in jaipur” वैसे ही ट्रैक हो जैसे जयपुर में बैठा कोई सर्च करने वाला उसे देखता है, लोकल पैक के साथ, न कि पूरे भारत के औसत नतीजे की तरह। डेस्कटॉप और मोबाइल अलग अलग ट्रैक होते हैं, और भारत में यह ज़रूरी है क्योंकि यहाँ की ज़्यादातर सर्च फ़ोन पर होती है और मोबाइल SERP पर मैप पैक और ऐड्स मिलकर ऑर्गैनिक नतीजों को नीचे धकेल देते हैं।
ऊपर बताए प्लान पर ट्रैकर रोज़ अपडेट होता है। हर कीवर्ड के लिए उस दिन का पूरा टॉप 100 SERP भी सेव रहता है, तो जब क्लाइंट पूछता है “हमारी जगह किसने ले ली”, आप उस दिन का स्नैपशॉट खोलकर दिखा सकते हैं। इस एक फ़ीचर ने टूल की बाक़ी किसी भी चीज़ से ज़्यादा असहज कॉल बचाई हैं।
हिंदी कीवर्ड भी ट्रैक होते हैं, देवनागरी में भी और Hinglish में भी। उनके वॉल्यूम के आँकड़े पतले हैं, जैसे हर टूल में होते हैं, क्योंकि Google ख़ुद इनके बारे में बहुत कम बताता है। ट्रैकिंग फिर भी चलती है, क्योंकि ट्रैकिंग सिर्फ़ लाइव SERP देखकर पोज़िशन निकालना है। लोकल बिज़नेस के लिए “mobile repair lucknow” और “मोबाइल रिपेयर लखनऊ” दो अलग कीवर्ड हैं जिनके नतीजे अलग हैं, और दोनों एक ही प्रोजेक्ट में रखे जा सकते हैं।
ऐसी रिपोर्ट जो क्लाइंट सच में खोलता है
रिपोर्ट बिल्डर ही वह वजह है कि कोई सस्ते ट्रैकर की जगह SE Ranking चुनता है। आप सेक्शन जोड़ते हैं (रैंकिंग समरी, पिछली रिपोर्ट से हुआ मूवमेंट, ऑडिट हेल्थ स्कोर, टॉप पेज, नए मिले बैकलिंक), टेम्पलेट बनाते हैं और शेड्यूल कर देते हैं। हफ़्तावार या महीनेवार, वह ख़ुद PDF या शेयर करने लायक़ लिंक बनकर मेल हो जाती है।
Agency Pack वाले प्लान पर उस पर अपना लोगो और अपना डोमेन लगाया जा सकता है। Agency Pack के बिना रिपोर्ट पर SE Ranking की ब्रांडिंग रहती है। हमारे ज़रिए लेने से पहले नीचे शेयर्ड एक्सेस वाला हिस्सा ज़रूर पढ़ लें, क्योंकि शेयर्ड अकाउंट पर अपना लोगो नहीं लगेगा।
भारतीय छोटे बिज़नेस मालिकों के साथ हमारा जो तजुर्बा है, उसमें क्लाइंट “विज़िबिलिटी” परसेंट और कीवर्ड के आगे लगे ऊपर नीचे वाले तीर देखता है। ऑडिट सेक्शन बहुत कम लोग पढ़ते हैं। रिपोर्ट दो पेज की रखिए और मूवमेंट चार्ट सबसे ऊपर।
वेबसाइट ऑडिट
ऑडिट क्लाइंट की साइट क्रॉल करके दिक़्क़तों को गंभीरता के हिसाब से छाँटता है: टूटे लिंक, ग़ायब टाइटल, डुप्लिकेट कंटेंट, धीमे पेज, रीडायरेक्ट चेन, ग़ायब alt टेक्स्ट। यह शेड्यूल पर दोबारा क्रॉल करता है और बताता है कि क्या बदला, तो पिछले हफ़्ते किया गया फ़िक्स अगली रिपोर्ट में ठीक हुई चीज़ के तौर पर दिखता है।
छोटी साइट के लिए यह अच्छा ऑडिट है और बड़ी साइट के लिए औसत, जो फ़्रीलांसर वाले पाठक के लिए ठीक ही है: 40,000 पेज वाला नोएडा का प्रॉपर्टी पोर्टल आपका आम क्लाइंट नहीं होता। ज़्यादातर भारतीय बिज़नेस साइट 20 से 500 पेज की हैं, WordPress पर किसी जानने वाले ने बना दी थीं, और ऑडिट हर एक में वही बीस दिक़्क़तें निकालता है। वही लिस्ट आपके पहले महीने का काम है।
अगर आप पूरी सुइट का पैसा दिए बिना ऑडिट चलाना चाहते हैं, तो हमने भारतीय फ़्रीलांसरों के लिए ख़ुद ऑडिट करने का तरीक़ा अलग से लिखा है, जिसमें एक क्रॉलर और Search Console के कुछ चेक से काम चलता है। SE Ranking का ऑडिट उससे ज़्यादा आरामदेह है और गहराई में लगभग बराबर।
भारतीय क्वेरी के लिए कीवर्ड रिसर्च
कीवर्ड टूल में भारत का डेटाबेस है और उसके लिए वॉल्यूम, डिफ़िकल्टी, कॉस्ट पर क्लिक और SERP फ़ीचर मिलते हैं। भारतीय इरादे वाली अंग्रेज़ी क्वेरी (“kurti wholesale surat”, “car rental bangalore”) के लिए नंबर काम लायक़ हैं। Hinglish के लिए वे अधूरे हैं और देवनागरी क्वेरी के लिए लगभग ख़ाली, क्योंकि नीचे का डेटा Google के विज्ञापनदाताओं वाले अनुमान से आता है और Google वहाँ लगभग कुछ नहीं बताता।
भारत के वॉल्यूम कीवर्ड को दिलचस्पी के हिसाब से क्रम में लगाने भर के लिए ठीक हैं। क्लिक के मामले में वे बढ़ा चढ़ाकर बताते हैं, क्योंकि यहाँ सर्च करने वालों का बड़ा हिस्सा किसी ऑर्गैनिक नतीजे पर क्लिक किए बिना ही निकल जाता है। महीने में 1,000 सर्च दिखाने वाला कीवर्ड पहली पोज़िशन पर भी उसका एक हिस्सा ही देगा।
यूके, यूएस या खाड़ी के क्लाइंट के लिए डेटाबेस गहरे हैं और नंबर Semrush और Ahrefs के आसपास रहते हैं। भारत में बैठकर उन बाज़ारों का काम लेने वाले फ़्रीलांसर को रिसर्च वाले हिस्से से ज़्यादा फ़ायदा मिलता है, बनिस्बत उनके जिनकी पूरी क्लाइंट लिस्ट लोकल है।
बैकलिंक मॉनिटरिंग
बैकलिंक चेकर साइट के लिंक दिखाता है, समय के साथ नए और खोए हुए लिंक ट्रैक करता है, और तुलना के लिए कॉम्पिटिटर जोड़ने देता है। इंडेक्स Ahrefs और Semrush से छोटा है। जिस भारतीय क्लाइंट के कुल 40 बैकलिंक हैं और उनमें आधे डायरेक्टरी साइट से हैं, उसके लिए छोटे इंडेक्स से कोई नुक़सान नहीं। बड़े पैमाने पर कॉम्पिटिटर रिसर्च करनी हो तो नुक़सान है। अगर आपकी सर्विस का मुख्य हिस्सा लिंक ही हैं, तो उसके लिए यह ग़लत टूल है।
भारत में यह किसके लिए है, और किसे छोड़ देना चाहिए
जमता है
- तीन या उससे ज़्यादा रिटेनर क्लाइंट वाले फ़्रीलांसर के लिए, जो अभी Google Sheets या Canva में हाथ से रिपोर्ट बनाता है। अकेले रिपोर्टिंग में बचा समय टूल का पैसा निकाल देता है।
- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद या कोच्चि की छोटी एजेंसी के लिए, जो लोकल बिज़नेस देखती है, जिन्हें शहर के लेवल की ट्रैकिंग और महीने की PDF चाहिए, और जहाँ दो तीन लोगों को एक ही प्रोजेक्ट दिखने चाहिए।
- भारत से यूके, यूएस या खाड़ी के क्लाइंट को SEO बेचने वाले किसी भी शख़्स के लिए, जिससे “ढंग की” रिपोर्ट माँगी जाती है। SE Ranking की रिपोर्ट वैसी ही दिखती है जैसी वे क्लाइंट अपने यहाँ की एजेंसियों से देख चुके हैं।
नहीं जमता
- अपनी ही साइट ट्रैक करने वाले ब्लॉगर या अफ़िलिएट मार्केटर के लिए। आपको रिपोर्ट बिल्डर की ज़रूरत ही नहीं। Mangools का SERPWatcher या Semrush के अंदर की Position Tracking कम मेहनत में वही ट्रैकिंग कर देती है।
- लिंक बिल्डिंग सर्विस के लिए। बैकलिंक इंडेक्स इतना छोटा है कि यह टूल उस काम की जान नहीं बन सकता।
- उसके लिए जिसे शेयर्ड एक्सेस पर अपनी ब्रांडिंग वाली रिपोर्ट चाहिए। शेयर्ड अकाउंट पर व्हाइट लेबल ब्रांडिंग अकाउंट की होती है, और अगला सेक्शन बताता है कि क्यों।
- उसके लिए जो एक शेयर्ड लॉगिन पर कई क्लाइंट के हज़ारों कीवर्ड ट्रैक करना चाहता है। कीवर्ड स्लॉट साझा पूल से आते हैं और आप दूसरे यूज़र्स से टकराएँगे। उस काम के लिए अपनी सीट चाहिए।
BundledSEO से आपको क्या मिलता है
हमारी साइट पर SE Ranking दो तरह से मिलता है, और आधा फ़ैसला यही चुनने में हो जाता है।
सिंगल टूल बनाम Ultimate प्लान
सिंगल टूल के तौर पर SE Ranking हमारे यहाँ ₹299/महीना है। यही इसे लेने का सबसे सस्ता रास्ता है। इसकी तुलना वेंडर के Core प्लान से कीजिए, जो सालाना बिलिंग पर €87.20 प्रति माह है (seranking.com/pricing, 21 सितंबर 2026 को देखा गया), और इस साल आपको जो भी एक्सचेंज रेट मिलेगा उस पर रुपये में वह कई गुना बैठता है।
इसे शामिल करने वाला इकलौता प्लान Ultimate प्लान है, ₹2,499/महीना में 91 टूल्स। यह Essential, Boost या Advanced प्लान में नहीं है। यहीं लोग चूकते हैं, क्योंकि Semrush, Serpstat और Mangools तीनों ₹1,499/महीना वाले Advanced प्लान में हैं और मान लेना स्वाभाविक है कि SE Ranking भी उन्हीं के साथ होगा, पर वह Advanced में आता ही नहीं।
तो भारतीय फ़्रीलांसर के लिए हिसाब यह बनता है:
- अगर आपको सिर्फ़ SE Ranking चाहिए, ₹299/महीना वाला सिंगल लीजिए। एक टूल के लिए प्लान मत ख़रीदिए।
- अगर आपको SE Ranking के साथ Semrush, Serpstat और Mangools भी चाहिए, तो चारों सिंगल मिलाकर भी Ultimate प्लान से काफ़ी नीचे रहते हैं। चार सिंगल लीजिए। या बाक़ी तीन के लिए Advanced प्लान लेकर ऊपर से SE Ranking सिंगल जोड़ लीजिए; यह जोड़ भी Ultimate से सस्ता पड़ता है।
- अगर आप SE Ranking के साथ Ahrefs, Screaming Frog, ChatGPT, Canva और दो चार डिज़ाइन या AI टूल भी नियमित चलाएँगे, तब Ultimate प्लान अपनी कीमत वसूल करने लगता है, क्योंकि Screaming Frog और vidIQ भी सिर्फ़ Ultimate में हैं और डिज़ाइन टूल्स का जोड़ बड़ा होता जाता है।
इस रिव्यू के ज़्यादातर पाठकों के लिए सही ख़रीद सिंगल टूल है, और हम यह कहना बेहतर समझते हैं, बजाय इसके कि आप ज़्यादा पैसा देकर अगले महीने कैंसिल कर दें।
शेयर्ड एक्सेस कैसे काम करता है
आप जो ख़रीद रहे हैं वह एक पेड SE Ranking अकाउंट का एक्सेस है, जिसे हम चलाते हैं और जिस पर दूसरे कस्टमर भी हैं, और जो आपके डैशबोर्ड से आम ब्राउज़र में खुलता है। प्रोडक्ट असली है और डेटा लाइव है। “शेयर्ड” होने से कुछ बातें निकलती हैं, और क्लाइंट का प्रोजेक्ट डालने से पहले उन्हें जान लीजिए:
- यह हमारे डैशबोर्ड से ब्राउज़र लॉगिन है। कोई API key नहीं मिलती, इसलिए रैंकिंग को अपने Looker Studio डैशबोर्ड या किसी स्क्रिप्ट में नहीं खींचा जा सकता। सब कुछ SE Ranking के इंटरफ़ेस के अंदर होता है।
- प्रोजेक्ट अकाउंट के बाक़ी यूज़र्स को भी दिखते हैं। अपने प्रोजेक्ट का नाम साफ़ रखिए और उसे निजी मत मानिए। अगर क्लाइंट ने यह बात गोपनीय रखने को कहा है कि वह आपका क्लाइंट है, तो उसका डोमेन शेयर्ड अकाउंट में डालने की जगह नहीं है।
- कीवर्ड स्लॉट, ऑडिट पेज और लोकेशन साझा पूल से चलते हैं। ऊपर वाली टेबल में दी गई वेंडर की लिमिट पूरे अकाउंट पर लागू होती हैं और सब उसी पूल से लेते हैं। दूसरों का व्यस्त हफ़्ता आपके लिए कम जगह छोड़ता है। व्यवहार में मुट्ठी भर क्लाइंट के कुछ सौ कीवर्ड ट्रैक करने वाला फ़्रीलांसर आराम से समा जाता है; हज़ार कीवर्ड वाला एक प्रोजेक्ट उस दिन के हिसाब से समा भी सकता है और नहीं भी।
- व्हाइट लेबल सेटिंग अकाउंट की होती है। रिपोर्ट पर जिसकी ब्रांडिंग सेट है वही दिखेगी, और आप अपना लोगो डालेंगे तो वह सबके लिए बदल जाएगा। अपनी ब्रांडिंग वाली क्लाइंट PDF के लिए अपनी सीट और ऊपर वेंडर की कीमत वाला Agency Pack चाहिए। हमारे यहाँ ज़्यादातर फ़्रीलांसर यह करते हैं कि डेटा एक्सपोर्ट करके रिपोर्ट अपने लेटरहेड पर बना लेते हैं, या SE Ranking की बिना ब्रांडिंग वाली PDF अपनी ब्रांडेड ईमेल के अटैचमेंट में भेज देते हैं।
- अकाउंट रीसेट हो सकते हैं। वेंडर पासवर्ड बदलते हैं, सेशन एक्सपायर होते हैं, और कभी कभी अकाउंट दोबारा बनाना पड़ता है। ऐसा हुआ तो आपके प्रोजेक्ट फिर से सेट करने पड़ सकते हैं। रैंकिंग हिस्ट्री हर महीने एक्सपोर्ट कीजिए; बारह महीने का क्लाइंट डेटा सिर्फ़ शेयर्ड अकाउंट में मत रहने दीजिए।
- फ़ेयर यूज़ लागू है। एक बंदे का लगातार भारी इस्तेमाल सबके लिए अकाउंट धीमा कर देता है, और हम उस पर कार्रवाई करते हैं। आम फ़्रीलांसर का इस्तेमाल उस लकीर के आसपास भी नहीं पहुँचता।
शेयर्ड एक्सेस का मतलब क्या है और क्या नहीं, और क्लाइंट का काम किसी भी प्रोवाइडर को सौंपने से पहले क्या पूछना चाहिए, इस पर पूरी बात हमारी गाइड्स में है।
लिमिट का मतलब आपके रिपोर्टिंग वर्कफ़्लो के लिए
क्लाइंट से उम्मीद तय करने से पहले अपने साथ तय कीजिए। शेयर्ड अकाउंट पर यह तरीक़ा चलता है:
- एक क्लाइंट का एक प्रोजेक्ट, नाम ऐसा कि किसका है साफ़ दिखे, जैसे
client-domain-in। - हर क्लाइंट के पचास से 150 ट्रैक किए कीवर्ड। पैसा देने वाले टर्म और टॉप पेज ट्रैक कीजिए, लंबी पूँछ वाली वैरिएशन छोड़ दीजिए।
- ऑडिट महीने के शेड्यूल पर। भारतीय छोटे बिज़नेस की साइट हफ़्ते दर हफ़्ते इतनी नहीं बदलती कि हर हफ़्ते क्रॉल का मतलब बने।
- महीने के आख़िरी कामकाजी दिन रैंकिंग CSV एक्सपोर्ट कीजिए, रिपोर्ट बनाने से पहले।
- रिपोर्ट टूल में बनाइए, PDF डाउनलोड कीजिए, और उसे अपनी ईमेल से, अपने सब्जेक्ट और अपने छोटे समरी के साथ भेजिए।
पहले तीस दिन कैसे चलाएँ
पहले क्लाइंट के साथ काम शुरू करने से पहले ट्रैकिंग चालू कर दीजिए। दो हफ़्ते का “पहले” वाला डेटा ही “बाद” वाले चार्ट को भरोसेमंद बनाता है।
पहला हफ़्ता प्रोजेक्ट सेट करने और कीवर्ड चुनने में जाता है। क्लाइंट से उसकी बिक्री वाली लिस्ट माँगिए, Search Console से पिछले तीन महीने की क्वेरी निकालिए, और दोनों मिलाकर पचास से 150 कीवर्ड बनाइए। लोकेशन उस शहर की रखिए जहाँ से क्लाइंट की असल बिक्री आती है, न कि जहाँ उसका रजिस्टर्ड ऑफ़िस है। सूरत के एक्सपोर्टर के लिए यह फ़र्क़ बड़ा हो सकता है।
दूसरे हफ़्ते ऑडिट चलाइए और उसकी लिस्ट को दो हिस्सों में बाँटिए: जो आप ख़ुद ठीक कर सकते हैं, और जिनके लिए क्लाइंट के डेवलपर की ज़रूरत है। दूसरी लिस्ट ईमेल पर भेजिए, ताकि महीने के आख़िर में देरी की वजह लिखित में मौजूद रहे।
तीसरे हफ़्ते रिपोर्ट टेम्पलेट बनाइए और उसका एक ड्राफ़्ट ख़ुद को भेजकर देखिए कि फ़ोन पर कैसी दिखती है। भारत में क्लाइंट रिपोर्ट WhatsApp पर फ़ोन में ही खोलता है, डेस्कटॉप पर नहीं। चौथे हफ़्ते डेटा एक्सपोर्ट कीजिए और पहली असली रिपोर्ट भेजिए, ऊपर दो लाइन में यह लिखकर कि क्या बदला और अगले महीने क्या होगा।
रुपये में बिलिंग, GST और क्लाइंट को क्या बताना है
टूल का खर्च आपकी लागत है, क्लाइंट की नहीं, और रिटेनर की कीमत तय करते समय यह गिनती में आना चाहिए। पाँच क्लाइंट पर SE Ranking का सिंगल ₹299/महीना बाँटिए तो हर क्लाइंट पर कुछ सौ रुपये से भी कम बैठता है, जो किसी भी ठीक ठाक रिटेनर में दिख भी नहीं पाता। दिक़्क़त तब आती है जब फ़्रीलांसर वेंडर के रिटेल प्लान का पैसा एक क्लाइंट से निकालने की कोशिश करता है।
GST रजिस्टर्ड फ़्रीलांसर या एजेंसी हैं तो टूल का खर्च बिज़नेस एक्सपेंस है और इनवॉइस आपके नाम पर चाहिए। हमारे यहाँ से ख़रीदने पर पेमेंट रसीद डैशबोर्ड में रहती है। रिटेनर इनवॉइस पर टूल का नाम लाइन आइटम की तरह लिखने से बचिए; “SEO टूल्स और रिपोर्टिंग” लिखिए, वरना अगला क्लाइंट वही टूल ख़ुद ख़रीदकर आपसे फ़ीस कम कराने की बात करेगा।
क्लाइंट को शेयर्ड अकाउंट के बारे में क्या बताएँ, यह सवाल अक्सर आता है। क्लाइंट आपसे नतीजा और रिपोर्ट ख़रीद रहा है, टूल का सब्सक्रिप्शन नहीं, इसलिए ज़्यादातर रिटेनर में यह बात उठती ही नहीं। जिस क्लाइंट की शर्त यह हो कि उसका डेटा किसी साझा सिस्टम में न जाए, उसे सच बताइए और उसके लिए अपनी सीट लीजिए। ऐसा क्लाइंट साल में शायद एक मिलता है, पर उसके साथ यह बात दबा देना बाद में महँगा पड़ता है।
हमारे कैटलॉग में इसके विकल्प
हमारे तीन टूल SE Ranking से मिलते जुलते काम करते हैं।
Semrush ₹199/महीना पर तब सही है जब रिसर्च आपके लिए रिपोर्टिंग जितनी ही ज़रूरी हो। इसका कीवर्ड और कॉम्पिटिटर डेटा SE Ranking से गहरा है, ख़ासकर यूके, यूएस और खाड़ी के बाज़ारों के लिए, और इसकी Position Tracking लोकल पैक समेत रैंक ट्रैकिंग का काम कर देती है। रिपोर्टिंग इसकी कमज़ोर है और क्लाइंट के लिए कम दोस्ताना। यह हमारे हर प्लान में है, इसलिए तय न कर पा रहे हों तो यह सुरक्षित डिफ़ॉल्ट है। दोनों की तुलना हमने भारत में कंटेंट स्टैक का असली खर्च में और विस्तार से की है।
Serpstat ₹299/महीना पर सबसे मिलता जुलता विकल्प है: कीवर्ड रिसर्च, रैंक ट्रैकिंग, बैकलिंक और कॉम्पिटिटर एनालिसिस एक ही प्लेटफ़ॉर्म में, और प्रोजेक्ट का मॉडल भी SE Ranking जैसा। इसका भारत का डेटा पतला है और रिपोर्ट बिल्डर सादा। इसे तब चुनिए जब ऑल इन वन चाहिए और आप वैसे भी Advanced प्लान ले रहे हैं, क्योंकि Serpstat Advanced में है और SE Ranking नहीं।
Mangools ₹199/महीना पर हल्का विकल्प है। SERPWatcher साफ़ सुथरे रोज़ाना चार्ट के साथ रैंकिंग ट्रैक करता है, KWFinder शुरुआत करने वाले के लिए सबसे आसान कीवर्ड टूल है, और पूरी सुइट एक दोपहर में समझ आ जाती है। इसमें ढंग का रिपोर्ट बिल्डर नहीं है और साइट ऑडिट भी नहीं। यह उस फ़्रीलांसर के काम का है जिसके एक या दो क्लाइंट हैं और जिसे अभी हर महीने PDF की ज़रूरत नहीं पड़ी।
अगर आप एक टूल नहीं, पूरा स्टैक चुन रहे हैं, तो हमारी भारत के लिए ग्रुप बाय SEO टूल्स वाली गाइड कैटलॉग को प्लान दर प्लान समझाती है।
भारत से कैसे ख़रीदें
- सिंगल या प्लान चुनिए। सिंगल ₹299/महीना के लिए SE Ranking का टूल पेज खोलिए, या ₹2,499/महीना वाले Ultimate प्लान के लिए प्राइसिंग सेक्शन। भारत चुनने पर पेज की कीमतें रुपये में आ जाती हैं।
- UPI से, कार्ड से या USDT से पैसे दीजिए। UPI भारत के लिए चालू है और चार्ज रुपये में होता है, कार्ड भी रुपये में ही चार्ज होते हैं, इसलिए आपको बैंक से विदेशी करेंसी वाले SaaS चार्ज की मंज़ूरी नहीं लेनी पड़ती, जो वेंडर के अपने चेकआउट पर सबसे आम अड़चन है। USDT रखते हों तो क्रिप्टो चेकआउट कहीं से भी चलता है।
- लॉगिन करके पहला प्रोजेक्ट बनाइए। पेमेंट के बाद एक्सेस आपके डैशबोर्ड में दिखने लगता है। वहाँ से SE Ranking खोलिए, एक क्लाइंट का प्रोजेक्ट बनाइए, लोकेशन में Google India और शहर सेट कीजिए, कीवर्ड लिस्ट पेस्ट कीजिए, और पहले दिन की ट्रैकिंग चलने दीजिए। रिपोर्ट टेम्पलेट दूसरे दिन बनाइए, जब दिखाने को डेटा हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या SE Ranking Advanced प्लान में है?
नहीं। SE Ranking सिर्फ़ ₹2,499/महीना वाले Ultimate प्लान में है, या ₹299/महीना पर सिंगल टूल के तौर पर मिलता है। Semrush, Serpstat और Mangools ₹1,499/महीना वाले Advanced प्लान में हैं, पर SE Ranking उसमें नहीं है, तो अगर आपको इन तीनों के साथ यह भी चाहिए तो या तो चार सिंगल लीजिए या Advanced प्लान के ऊपर SE Ranking का सिंगल। दोनों जोड़ Ultimate से कम बैठते हैं।
क्या किसी एक शहर के लिए google.co.in पर रैंकिंग ट्रैक हो सकती है?
हाँ। हर प्रोजेक्ट में सर्च इंजन और लोकेशन होती है, और लोकेशन में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, जयपुर, लखनऊ या कोई और भारतीय शहर सेट किया जा सकता है। डेस्कटॉप और मोबाइल के नतीजे अलग अलग ट्रैक होते हैं, और उस दिन का SERP स्नैपशॉट सेव रहता है, तो आप क्लाइंट को ठीक ठीक दिखा सकते हैं कि उस दिन उसके ऊपर कौन था।
क्या क्लाइंट रिपोर्ट पर मेरा अपना लोगो आएगा?
शेयर्ड एक्सेस पर नहीं। व्हाइट लेबल ब्रांडिंग अकाउंट लेवल पर सेट होती है, और शेयर्ड अकाउंट पर वह उसी की रहती है जिसने उसे सेट किया। वेंडर के अपने प्राइसिंग पेज (21 सितंबर 2026 को देखा गया) के मुताबिक़ व्हाइट लेबल के लिए Agency Pack ऐड ऑन चाहिए, प्लान के ऊपर +€59.00 प्रति माह, सालाना बिलिंग पर। हमारे यहाँ से लेने पर डेटा एक्सपोर्ट करके अपनी रिपोर्ट बनाइए, या बिना ब्रांडिंग वाली PDF अपनी ईमेल के साथ भेजिए।
शेयर्ड अकाउंट ट्रायल है या असली प्रोडक्ट?
यह असली पेड प्रोडक्ट है। आपको वही इंटरफ़ेस, वही रोज़ाना ट्रैकिंग और वही ऑडिट क्रॉलर मिलता है जो किसी भी सब्सक्राइबर को मिलता है। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि प्लान की लिमिट, जैसे ट्रैक किए कीवर्ड और ऑडिट पेज, दूसरे यूज़र्स के साथ साझा होती हैं, और API एक्सेस नहीं मिलता।
भारत से पेमेंट कैसे करें?
UPI, कार्ड और USDT, तीनों अभी चालू हैं। UPI और कार्ड दोनों पर चार्ज रुपये में होता है। वेंडर का अपना चेकआउट विदेशी करेंसी में बिल करता है, और भारतीय कार्ड सबसे ज़्यादा वहीं अटकते हैं; हमें रुपये में पैसा देने से वह क़दम बीच में आता ही नहीं।
अकाउंट रीसेट हुआ तो मेरे प्रोजेक्ट का क्या होगा?
शेयर्ड अकाउंट कभी कभी दोबारा बनाए जाते हैं, और तब प्रोजेक्ट फिर से बनाने पड़ सकते हैं। हर महीने रैंकिंग और ऑडिट के नतीजे CSV में एक्सपोर्ट कीजिए, और कीवर्ड लिस्ट अपनी स्प्रेडशीट में रखिए, ताकि प्रोजेक्ट दस मिनट में दोबारा खड़ा हो जाए। क्लाइंट की रैंकिंग हिस्ट्री की इकलौती कॉपी शेयर्ड अकाउंट में मत रखिए।
क्या कीवर्ड टूल में भारत का डेटा काम का है?
भारतीय इरादे वाली अंग्रेज़ी क्वेरी के लिए हाँ, इस शर्त के साथ कि वॉल्यूम अनुमान ही हैं। Hinglish के लिए डेटा अधूरा है और देवनागरी के लिए लगभग ख़ाली, जो हर SEO टूल का हाल है क्योंकि Google ख़ुद इनके बारे में बहुत कम छापता है। रैंक ट्रैकिंग इन सबके लिए फिर भी चलती है, क्योंकि ट्रैकिंग लाइव रिज़ल्ट पेज पढ़ती है, वॉल्यूम डेटाबेस नहीं।
सिंगल टूल लूँ या Ultimate प्लान?
₹299/महीना वाला सिंगल लीजिए, बशर्ते आप Ultimate के बाक़ी 91 टूल्स में से कई नियमित इस्तेमाल न करने वाले हों, जैसे Ahrefs, Screaming Frog, ChatGPT, Canva या AI वीडियो टूल्स। अगर प्लान देखने की इकलौती वजह SE Ranking है, तो प्लान ग़लत ख़रीद है।